Home / India / आतंकवाद बना सरदर्द देखे इसके लिए दुनिया की राय क्या है?

आतंकवाद बना सरदर्द देखे इसके लिए दुनिया की राय क्या है?

terror-attacks

आतंकवाद आज दुनिया भर के लिए नासूर बन गया है। जिस तेज़ी से आतंकवाद ने अपने पाँव पसारे हैं उससे पूरी मानव जाती के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। इस्लाम के नाम पर जो नरसंहार दुनिया भर में चलाया जा रहा है उसका रोका जाना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन इसको रोकने से पहले इसकी उत्पत्ति के कारण को जानना भी बहुत आवश्यक है। बहुत से न्यूज़ चैनल और अखबार इसके लिए कभी पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराते हैं तो कभी इस्लाम को। लेकिन सवाल ये उठता है के क्या वाकेहि ये आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार हैं या कोई और?

संभावित कारण- बहुत से जानकार आतंकवाद का कारण इस्लाम और उसकी विस्तारवादी सोच को मानते हैं। उनके अनुसार कुछ लोग इस्लाम के नाम पर अपनी विचारधारा पूरी दुनिया पर थोप देना चाहते हैं। इसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकते हैं। कुछ लोग इसके लिए पाकिस्तान की कट्टर सोच को सरंक्षण की नीति को दोषी मानते हैं। आतंक के सबसे बड़े आका ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में पाया जाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लेकिन कई ऐसे देश भी हैं जो पाकिस्तान की जद में नहीं हैं फिर भी वहां आतंकवाद फल फूल रहा है जैसे की नाइजीरिया, जहाँ आये दिन बोको हराम सैंकड़ों लोगों को मार रहा है। इसके लिए निश्चित रूप से पाकिस्तान को तो ज़िम्मेदार नहीं माना जा सकता। हाँ, इन सबमें एक बार ज़रूर समान है – इस्लाम की व्याख्या। ये आतंवादियों द्वारा अपने हिसाब से की गयी इस्लाम की गलत व्याख्या ही है जो नयी मुस्लिम पीढ़ी को इस्लाम के नाम पर निर्दोष लोगों, यहाँ तक के छोटे बच्चों को भी  मारने के लिए प्रोत्साहित करती है। और इसका बराबरी से साथ देती है अमेरिका और रूस की दुनिया भर में हथियार बेचने की होड़। मिसाल के तौर पर सीरिया में बशर अल असद की सरकार ने जब रूस से हथियार लेने का समझौता किया तो अमेरिका ने सीरिया के विद्रोही संगठन को हथियार दे कर देश में गृह युद्ध छिड़वा दिया। इसी संगठन ने आगे जा कर ISIS का रूप ले लिया और कई देशों में अपना नेटवर्क फैला दिया। फिर इसी संगठन को रोकने के लिए अमेरिका ने इराक सहित दूसरे देशों को हथियार बेचना शुरू कर दिया। इस तरह से अमेरिका ने खुद ही आतंकवाद को जन्म दिया और खुद ही दोनों तरफ हथियार बेच कर अच्छा खासा पैसा कमाया। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने पिछले साल विभिन्न संगठनो को हथियार बेच कर 26000 करोड़ डॉलर कमाए हैं। वास्तव में हथियारों का लेनदेन अमेरिका की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है। और इसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है। रूस को हराने के लिए ओसामा को सहयोग देना और भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार देना इसी नीति का हिस्सा है।

terrorism-in-world

क्या कभी होगा आतंकवाद का अंत- अगर दुनिया के चंद शक्तिशाली देश इसी तरह भटके हुए नौजवानों के हाथ में हथियार पकड़ाते रहे तो आतंकवाद का अंत मुश्किल है। अगर हम लोग वास्तव में आतंकवाद का अंत करना चाहते हैं तो हमें हथियारों की हौड़  को पीछे धकेल कर धर्म की सही व्याख्या से पूरे विश्व में शांति स्थापित करनी होगी। नहीं तो हम हज़ार युद्ध लड़ कर भी इस समस्या से निजात नहीं पा सकते।

[socialpoll id=”2290220″]
loading...

Check Also

Earthquake-China

चीन में भूकंप के महसूस किए गए झटके

चीन में आज भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। हालांकि इससे अभी तक इससे ...

Leave a Reply