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शादी से पहले क्यों किया जाता है कुंडली मिलान?

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हिंदू धर्म शास्त्रों में हमारे सोलेह संस्कार बताए जाते है। इन संस्कारों में काफ़ी महत्वपूर्ण हैं- विवाह संस्कार। शादी को व्यक्ति का दूसरा जन्म माना जाता है क्योंकि इनके बाद वार-वधू सहित दोनों के परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल जाता है, इसलिये विवाह के संबंध में कई महत्वपूर्ण सावधानी रखना ज़रूरी है। विवाह के बाद वार-वधू का जीवन सुख और खुशियों से भरा हो यही कामना की जाती है।

वार-वधू का जीवन  सुखी बना रहे इसके लिए विवाह पूर्व लडके और लडकी कि कुंडली का मिलन कराया जाता है। किसी विशेषग्य ज्योतिष द्वारा भावी दम्पति कि कुंडलियो से दोनों के गुण और दोष मिलाए जाते है। साथ ही दोनों कि पत्रिका में ग्रहों कि स्थिति को देखते हुए इनका वैवाहिक जिवन कैसा रहेगा? यह भी सटिक अंदाजा लगाया जाता है। यदि दोनों कि कुंडलियो के आधार पर इनका जीवन सुखी प्रतीत होता है, तभी ज्योतिष विवाह करने कि बात कहता है।

कुंडली मिलान से दोनों ही परिवार वर-वधु के बारे में काफी जानकारी प्राप्त कर लेते है। यदि दोनों में से किसी कि भी कुंडली में दोष हो और इस वजह से इनका जीवन सुख-शांति वाला नही होता है तो ऐसा विवाह नही कराया जाना चाहिए।

कुंडली के सही अध्धयन से किसी भी व्यक्ति के सभी गुण-दोष जाने जा सकते है। कुंडली में स्थित ग्रहों के आधार पर ही हमारा व्यव्हार, आचार-विचार आदि निर्मित होते है। उनके भविष्य से जुडी बातो कि जानकारी प्राप्त कि जाती है। कुंडली से ही पता लगाया जाता है कि वर-वधु दोनों भविष्य में एक दुसरे कि सफलता के लिए सहयोगी सिद्ध होंगे या नही। वर-वधु कि कुंडली मिलाने से दोनों के एक साथ भविष्य कि संभावित जानकारी प्राप्त हो जाती है। इसीलिए विवाह से पहले कुंडली मिलान किया जाता है।

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