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घर में लक्ष्मी स्थायी रखने के लिए करने चाहिए ये उपाय

Laxmi-mata

वंदनवार– आम या पीपल के नये कोमल पत्तो की माला को वंदनवार कहा जाता है। इसे दीपावली के दिन पूर्वी द्वार पर बांधा जाता है। यह इस बात का प्रतीक है की देवगण इन पत्तो की भीनी-भीनी सुगंध से आकर्षित होकर घर में प्रवेश करते है। ऐसी मान्यता है कि दीपावली की वंदनवार पूरे 31 दिनों तक बंधी रखने से घर परिवार में एकता व शांति बनी रहती है।

स्वस्तिक – लोक जीवन में प्रत्येक अनुष्ठान के पूर्व दीवार पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाया जाता है । उत्तर ,दक्षिण, पूर्व, और पश्चिम इन चरों दिशाओं को दर्शाती स्वस्तिक कि चरों भुजाए ब्रह्मचर्ये, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास अश्रामों का प्रातीक मानी गई है । यह चिन्ह केसर, हल्दी या सिन्दूर से बनाया जाता है।

कौड़ी- लक्ष्मी पूजन कि सजी थाली में कौड़ी रखने कि प्राचीन परमपरा है। क्योंकी यह धन और श्री का पर्याय है। कौड़ी को तिजौरी में रखने से लक्ष्मी कि कृपा सदा बनी रहती है।

कलावा – यह मांगलिक चिन्ह संगठन कि शक्ति का प्रातीक है । जिसे पूजा के समय कलाई पर बंधा जाता है।

तिलक – पूजन के समय तिलक लगाया जाता है। ताकि मष्तिस्क में बुद्धि, ज्ञान और शांति का प्रसार हो।

पान- चावल – ये भी दीप पर्व के शुभ- मांगलिक चिन्ह है। पान घर कि शुद्धि करता है तथा चावल घर में कोई काला दाग ने लगने देता।

बताशे या गुड – ये भी ज्योति पर्व के मांगलिक चिन्ह है। लक्ष्मी- पूजन के बाद गुड – बताशे का दान करने से धन में वृद्धि होती है।

गन्ना – लक्ष्मी के ऐरावत हाथी की प्रिय खाध्या- सामंग्री गन्ना है। दीपावली के दिन पूजा में गन्ना शामिल करने से ऐरावत प्रसन्न रहते है। इससे रिश्ते व वाणी कि मिठास घर में बनी रहती है।

ज्वार का पोखरा – दीपावली के दिन ज्वार का पोखरा घर में रखने से धन में वृद्धि होती है। तथा वर्ष भर किसी भी तरह के आनाज कि कमी नही आती। लक्ष्मी के पूजन के समय ज्वार के पोखरे कि पूजा करने से घर में हीरे-मोती का आगमन होता है।

रंगोली- लक्ष्मी पूजन के स्थान तथा प्रवेश द्वार व आगन में रंगो के संयोजन के द्वारा धार्मिक चिन्ह कमल,स्वास्तिक कलश,फूल पत्ती आदि अंकित कर रंगोली बनाई जाती है। कहते है लक्ष्मी जी रंगोली कि और जल्दी आकर्षित होती है।

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